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फिर से

Posted by Deepak in , ,



फिर से धड़क रहा है दिल किसी और के लिए,
फिर से बेगानेपन का मुझे एहसास हो रहा है।

फिर से बेवफाई किसी के साथ कर रहा हूँ,
फिर से वक़्त के हाथों मजबूर हो गया हूँ।

फिर से मेरा ग़म कुछ कम हो रहा है,
फिर से कोई शायद मेरे साथ रो रहा है।

फिर से किसी दोस्त की ज़रूरत है मुझे,
फिर से दुश्मनों के बीच आ खड़ा हुआ हूँ।

फिर से उस ख़ुदा से ये सवाल हो रहा है,
फिर से क्यों ये सब मेरे साथ हो रहा है।

फिर से उसे सोच कर परेशां हो रहा हूँ,
फिर से दिल बहलाने को ये ग़ज़ल लिख रहा हूँ।